76 दिन बाद घर पहुंचा अशोक पुलिस जुर्म कबूलने को उल्टा लटका कर  पीटती...
(DELHI, DELHI) रेयान इंटरनेशनल स्कूल के छात्र प्रद्युम्न की हत्या मामले में स्कूल का बस कंडक्टर अशोक कुमार जेल से रिहा हो गया। जेल में 76 दिन बिताने के बाद बुधवार को घर पहुंचे अशोक ने कई खुलासे किये। अशोक ने बताया कि उसने जेल में काफी दर्द सहा और जुर्म कबूलने के लिए पुलिस ने खूब टॉर्चर किया।
अशोक की पत्नी ने बताया कि पुलिस अशोक को मारती थी उल्टा लटका देती थी और जुर्म कबूलने के लिए उसे यातनाएं देती थी।
आपको बता दें कि 8 सितंबर को प्रद्युम्न की हत्या के बाद बस कंडक्टर अशोक को गिरफ्तार कर लिया गया था। पुलिस ने उस वक्त ये दावा किया था कि अशोक ने जुर्म कबूल कर लिया है। लेकिन सीबीआई की जांच में अशोक के खिलाफ कोई सबूत नहीं मिले और सीबीआई ने उसे क्लीन चिट दे दी। तब कोर्ट ने 50 हजार के मुचलके पर अशोक को रिहा कर दिया।
स्कूल स्टॉफ के दो सदस्यों और अशोक के परिवार (पिता अमीरचंद) का दावा है कि गरीब परिवार से होने के कारण अशोक को बलि का बकरा बनाया गया। अमीरचंद ने कहा कि हरियाणा पुलिस ने उनके बेटे को अपराध कबूलने के लिए नशीला पदार्थ दिया और उसपर बेरहमी से अत्याचार किए। मंगलवार को जज रजनी यादव ने अशोक को 50,000 रुपये के मुचलके पर जमानत दे दी थी।
प्रद्युम्न हत्या मामले में सीबीआई ने जांच के बाद कई राज फास किये और अक्टूबर में उसी स्कूल के 11वीं के छात्र को गिरफ्तार किया।
सीबीआई के मुताबिक सीनियर छात्र ने अपने जूनियर की हत्या सिर्फ इसलिए कर दी, क्योंकि वो पीटीएम और स्कूल की परीक्षा को टालना चाहता था।
बच्चों से पूछताछ में सीबीआई को मिला सुराग
इस मामले में आठ सेकेंड की सीसीटीवी फुटेज सबसे अहम सुबूत बनी। इसमें तीन-चार लोगों की हल्की तस्वीर दिख रही थी। इसमें बच्चों के पीछे का बैग दिख रहा था। जिसे अधिकारी पहचानने के लिये तीन-चार बार वीडियो को दिखाकर बच्चों से पूछताछ कर रहे थे। इसके बाद बच्चों ने आरोपी के बैग के बारे में जानकारी दी थी।
एफआईआर रिपोर्ट में भी अंजू डुडेजा मैडम का नाम दर्ज है। घटना की सूचना भी उन्हीं के हवाले से दी गई थी। पुलिस ने अंजू मैडम से तीन बार पूछताछ की थी। सीबीआई भी अंजू डुडेजा से पूछताछ कर चुकी है। घटना की जानकारी उसे माली हरपाल ने दे दी थी इसके बाद वह अशोक की मदद से अस्पताल ले गईं। ऐसे में सवाल है कि अशोक को जब उन्होंने देखा तो क्या उस वक्त अशोक के कपड़ों पर खून के छींटे थे। अशोक की मनोदशा क्या थी?
पुलिस ने कक्षा दो के उन तीन बच्चों से भी पूछताछ की थी जो बाथरूम में कराटे की ड्रेस बदलने आए थे। पुलिस ने दावा किया था कि बच्चों से जानकारी दी कि बाथरूम में जाते और आते वक्त अशोक को देखा था। पुलिस ने इन बयानों को 164 के बयान कोर्ट में दर्ज कराए थे। पुलिस ने जांच में इस बड़ा अहम बताया था और इसी आधार पर अशोक को मुख्य आरोपी बनाया था। इन बच्चों के अभी भी महत्वपूर्ण हैं।
हत्या की जानकारी सबसे पले हरपाल को मिली थी हरपाल ने अंजू मैडम और दूसरे बच्चों के बाथरूम में पड़े होने की सूचना दी थी। शुरुआती बयान में हरपाल ने अशोक का बचाव किया और कहा था कि अशोक के कपड़ों पर खून नहीं था।
प्रद्युम्न की हत्या में सीबीआई की तरफ से हत्यारोपी बनाए गए 11वीं के छात्र से भी पुलिस ने पूछताछ की थी हालांकि पुलिस को छात्र अपने जवाबों से गच्च दे दिया था। कुछ ही घंटे बाद पुलिस ने छात्र को क्लीन चिट दे दी थी और अशोक के खिलाफ पुलिस ने इसी छात्र को मुख्य गवाह भी बनाया था। फिर सीबीआई के सामने कबूलनामा व सुधारगृह पहुंच बयान से मुकरने से पूरे मामला संदेह के घेर में है।

Author: JAN TV Editorial Team

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