सूत्रों ने बताया कि पाकिस्तानी सेना इतनी तादाद में अपने सैनिकों के हताहत की बात नहीं मानी और कुछ मामलों में सैनिकों की मौत को नागरिक की क्षति करार दिया।
पिछले एक साल के दौरान भारतीय सेना की तरफ से संघर्ष विराम उल्लंघन और जम्मू कश्मीर में आतंकी गतिविधियों के खिलाफ काफी कड़ा रूख अपनाया गया है। खुफिया सूत्रों ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया कि साल 2017 में सीमा पार फायरिंग के खिलाफ जवाबी कार्रवायी और रणनीतिक ऑपरेशन में पाकिस्तानी सेना के 138 जवान मारे गए जबकि 155 घायल हुए। हालांकि इस दौरान 70 भारतीय सेना के जवान भी सीमापार फायरिंग और अन्य घटनाओं में घायल हुए।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक 2017 में कुल 860 संघर्ष विराम उल्लंघन के मामले सामने आए जबकि 2016 में ये मामले सिर्फ 221 थे। सूत्रों के मुताबिक ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी की ये नीति है कि वह अपने सेना के जवानों की मौत को स्वीकार ना करे। उन्होंने करगिल का भी उदाहरण दिया जब भारत की तरफ से सबूत देने के बावजूद पाकिस्तान ने अपनी सेना की मौत से इनकार कर दिया था।
सूत्रों ने यह भी बताया कि पिछले साल 25 दिसंबर को जब पांच सेना के कमांडों ने जम्मू कश्मीर में नियंत्रण रेखा पार कर तीन पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया था उस वक्त पाकिस्तान की तरफ से इसे मानते हुए ट्वीट किया गया था। लेकिन बाद में उसे डिलीट कर दिया गया था।
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Author: JAN TV Editorial Team
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