बस का सिग्नल क्रास करना और मौके पर ट्रैफिक पुलिस की गैर-मौजूदगी ने स्थानीय लोगों के गुस्से की चिंगारी को और भड़का कर रख दिया। जिसके बाद उन लोगों ने भीड़ को नियंत्रित करने आये पुलिसवालों पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए। पुलिसवाले वहां पर पूरी तरह से असहाय नज़र आए और प्रदर्शनकारियों ने उनके सामने ही चार बसें फूंक डाली और एक पुलिस गाड़ी में तोड़फोड़ की। साथ ही बस में लगी आग बुझाने के लिए आयी फायर इंजन गाड़ी पर भी धावा बोल दिया।
ख़बरों के मुताबिक दोनों युवक जिनकी बस से कुचलकर मौत हुई है- संजय बोनु और बिश्वजीत भुइया दोनों कॉलेज के छात्र थे। एक टेलीविज़न चैनल पर रोती हुई भुइया की मां ने कहा कि उसने सुबह करीब साढ़े दस बजे दोस्त के साथ उसकी शादी समारोह के लिए कुछ सामान खरीदने गया था। उन्होंने कहा कि इस मौत के लिए पुलिस कसूरवार है। वे कभी भी ठीक तरीके से ट्रैफिक को कंट्रोल नहीं करती है। उनका पति एक साइकिल रिपेयरिंग का शॉप चलाते हैं।
यह घटना ऐसे वक्त पर हुई है जब पश्चिम बंगाल में लगातार सड़क दुर्घटनाएं बढ़ रही है। 29 जनवरी को मुर्शिदाबाद जिले में एक बस के नदी में गिरने के चलते 44 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि उससे पहले 17 जनवरी को मेदिनीपुर में एक बस के नदी में गिरने की वजह से आठ लोगों की मौत हो गई थी।
Author: JAN TV Editorial Team
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