मीडिया घरानों की ओर से पेश वकीलों ने हाईकोर्ट को बताया कि पीड़िता की पहचान जाहिर करने की गलती कानून की जानकारी नहीं होने और इस गलतफहमी के कारण हुई कि चूंकि पीड़िता की मौत हो चुकी है, ऐसे में उसका नाम लिया जा सकता है।
कार्यवाहक चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस सी. हरिशंकर की बैंच ने निर्देश दिया कि मुआवजा राशि हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल के पास हफ्ते भर के अंदर जमा की जाए और राशि जम्मू-कश्मीर विधिक सेवा प्राधिकरण के खाते में भेजी जाए जिसे राज्य की पीड़ित मुआवजा योजना के लिए इस्तेमाल में लाया जाए।
Author: JAN TV Editorial Team
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