Starlink को भारत में सेवा शुरू करने के लिए IN-SPACe (Indian National Space Promotion and Authorization Center) से अंतिम मंजूरी का इंतजार है। कंपनी ने सभी आवश्यक तकनीकी और कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कर ली हैं।
दिलचस्प बात यह है कि जहां दूसरी कंपनियां भारत में महंगे स्पेक्ट्रम को लेकर चिंता जता रही हैं, वहीं Starlink को इससे कोई खास परेशानी नहीं है। इसकी वजह है कंपनी की लो-अर्थ ऑर्बिट (LEO) आधारित सैटेलाइट तकनीक, जो पारंपरिक टेलिकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर नहीं रहती।
अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा, तो Starlink की एंट्री भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा दे सकती है, खासकर ग्रामीण और सीमावर्ती इलाकों में, जहां अब तक तेज़ इंटरनेट पहुंच नहीं सका है।
Author: JAN TV Editorial Team
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