भारत को अगली पीढ़ी की इंटरनेट तकनीक '6G' के लिए तैयार करने की दिशा में भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ट्राई के चेयरमैन अनिल कुमार लाहोटी ने 600MHz स्पेक्ट्रम बैंड की वैधता बढ़ाने की घोषणा की है, जो हाई-स्पीड इंटरनेट और व्यापक नेटवर्क कवरेज के लिए रीढ़ की हड्डी साबित होगा। नियामक ने स्पेक्ट्रम के अधिकतम उपयोग के लिए टेलीकॉम कंपनियों के बीच 'इंटर-बैंड स्पेक्ट्रम शेयरिंग' और लीजिंग के सुझाव दिए हैं। इसके अलावा, सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को साझा करना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे नेटवर्क विस्तार की लागत में कमी आएगी और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में बेहतर कनेक्टिविटी सुनिश्चित होगी।
- ब्रॉडबैंड का रिकॉर्ड विस्तार और AI की चुनौती
देश में डिजिटल क्रांति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 2025-26 के दौरान रिकॉर्ड 1.7 करोड़ नए फिक्स्ड ब्रॉडबैंड यूजर्स जुड़े हैं। ट्राई के अनुसार, आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन-टू-मशीन (M2M) कम्युनिकेशन के बढ़ते चलन के कारण मौजूदा मोबाइल नेटवर्क पर दबाव काफी बढ़ जाएगा। इस चुनौती से निपटने के लिए फाइबर और फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (FWA) के हाइब्रिड मॉडल पर जोर दिया जा रहा है। साथ ही, इनडोर कनेक्टिविटी की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए अब इमारतों के डिजाइन में ही डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को शामिल करना अनिवार्य होगा, जिसे सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है।
Author: JAN TV Editorial Team
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