वैज्ञानिकों के अनुसार ऊंटनी का दूध सामान्य रूप से आसानी से फटता नहीं है, इसलिए पनीर बनाने के लिए इसमें गाय के दूध को मिलाया गया, जिससे दूध सही तरीके से जम सका।
शोधकर्ताओं का कहना है कि ऊंटनी के दूध में मौजूद स्वास्थ्य और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुणों को देखते हुए इस पर प्रयोग करने का विचार आया। लंबे समय से कैमल मिल्क को पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता रहा है।
परियोजना से जुड़े वैज्ञानिकों के मुताबिक यह नया उत्पाद जल्द ही बाजार में उपलब्ध हो सकता है। उनका मानना है कि इस उपलब्धि से भविष्य में ऊंटनी के दूध से बने अन्य डेयरी उत्पादों का रास्ता भी खुलेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह शोध राजस्थान जैसे रेगिस्तानी क्षेत्रों में डेयरी उद्योग को नई दिशा देने के साथ-साथ ऊंट पालन से जुड़े लोगों के लिए आय के नए अवसर भी पैदा कर सकता है।
Author: JAN TV Editorial Team
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