(India)
आजकल AI चैटबॉट्स जैसे 7 Cups, Character.ai और ChatGPT ऐसे टूल बनते जा रहे हैं, जिनसे लोग अपने मन की बातें शेयर करते हैं। कई लोग इन्हें हल्की-फुल्की थेरेपी का ज़रिया मानने लगे हैं। लेकिन क्या ये चैटबॉट्स इंसानी थेरेपिस्ट की जगह ले सकते हैं? इस सवाल का जवाब स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की एक रिसर्च ने दिया है। रिसर्च में पाँच पॉपुलर थेरेपी चैटबॉट्स का टेस्ट किया गया, ताकि ये जाना जा सके कि ये कितनी सहानुभूति दिखाते हैं, कितना निष्पक्ष रहते हैं और मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील मुद्दों को कैसे संभालते हैं। नतीजा यह निकला कि AI टूल्स अभी इंसानी थेरेपिस्ट की जगह लेने के लिए तैयार नहीं हैं। कुछ चैटबॉट्स ने स्किजोफ्रेनिया और शराब की लत वाले लोगों को लेकर नकारात्मक सोच दिखाई, जबकि डिप्रेशन के मामलों में ऐसा नहीं था। इसके अलावा, जब उन्हें आत्महत्या जैसे गंभीर मामलों के मैसेज दिए गए, तो कुछ बॉट्स ने ऐसे जवाब दिए जो नुकसान पहुँचा सकते थे, जैसे NYC के ऊंचे पुलों की जानकारी देना। रिसर्च का साफ संदेश है: AI चैटबॉट्स से थोड़ी मदद मिल सकती है, लेकिन इन्हें थेरेपिस्ट का विकल्प नहीं माना जा सकता — खासकर बिना एक्सपर्ट की निगरानी के।*
Author: JAN TV Editorial Team
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