एनसीईआरटी ने किया स्पष्ट: इतिहास की किताबों में केवल प्रमाणिक तथ्य, कल्पनाओं की नहीं कोई जगह
(India) एनसीईआरटी की कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक को लेकर जारी बहस के बीच निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने स्पष्ट किया है कि किताब में शामिल सभी ऐतिहासिक जानकारियां पूरी तरह से प्रमाणिक और विश्वसनीय स्रोतों पर आधारित हैं। उन्होंने बताया कि इन तथ्यों को किसी कल्पना के आधार पर नहीं, बल्कि बाबरनामा, बनारस गजेटियर, साकी मुत्तिद खान की ‘मआसिर-ए-आलमगिरी’ (जिसका अनुवाद सर जदुनाथ सरकार ने किया), आरसी मजूमदार की ‘द हिस्ट्री एंड कल्चर ऑफ द इंडियन पीपल’, और खफी खान की ‘मुंतखब-अल-लुबाब’ जैसी ऐतिहासिक कृतियों से लिया गया है। प्रो. सकलानी ने यह भी कहा कि इन पुस्तकों के माध्यम से छात्रों को केवल घटनाओं की जानकारी नहीं दी जाती, बल्कि उनके सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक प्रभावों की गहरी समझ विकसित करने पर ज़ोर दिया गया है। उन्होंने कहा कि एनसीईआरटी का मकसद छात्रों में एक समग्र ऐतिहासिक दृष्टिकोण को विकसित करना है, जिससे वे भारत के जटिल और बहुआयामी इतिहास को संतुलित नजरिए से समझ सकें।

Author: JAN TV Editorial Team

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