800 साल बाद फिर खुली नालंदा यूनिवर्सिटी
(India) सोमवार से यहां 21वीं शताब्दी का पहला सेशन शुरू हुआ। वर्ष 2006 में पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम ने इसे फिर से खोलने का प्रस्ताव रखा था। एनयू के वाइस-चांसलर गोपा सभरवाल ने कहा, "हम लो-की लॉन्च रखेंगे और शुरूआत में यहां स्कूल ऑफ इकोलॉजी एंड एंनवार्यनमेंटल स्टडीज और स्कूल ऑफ हिस्टॉरिकल स्टडीज की क्लास शुरू की जाएगी। फिलहाल हमारे पास 15 स्टूडेंट्स हैं और 11 फैकल्टी मेंबर्स हैं।"
सभरवाल ने बताया कि यूनिवर्सिटी को इतने छोटे पैमाने पर शुरू करने के पीछे दो कारण हैं - पहला कि वे चाहती हैं कि बच्चे और टीचर दोनों ही सेटल हो जाएं और दूसरा 14 सितंबर को केंद्रीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज यहां आएंगी। सभरवाल ने कहा, "स्वराज के आने पर 14 सितंबर हम बड़ा आयोजन करेंगे।"
इससे पहले रविवार को यहां तीन दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम समाप्त हुआ। वीसी ने बताया, "देश विदेश से 1000 से ज्यादा बच्चों ने यहां एडमिशन के लिए आवेदन किया था, जिनमें से 15 स्टूडेंट्स को चुना गया है। इन स्टूडेंट्स में 1 जापान और 1 भूटान से भी शामिल है।" एनयू में फिर से शुरूआत नालंदा यूनिवर्सिटी एक्ट के तहत की गई है। इकोनॉमिस्ट अमृत्या सेन यूनिवर्सिटी की गवर्निग बॉडी के चेयरमैन हैं, जबकि कई देशों के नामचीन टीचर्स इसके सदस्य हैं। यह यूनिवर्सिटी इन कारणों से है खास-
- पांचवी शताब्दी में इस यूनिवर्सिटी की स्थापना गुप्ता किंग्स ने की थी। यूनिवर्सिटी से मिली सील के मुताबिक इसकी स्थापना सक्रादित्य के राज के दौरान हुई।
- यह विश्व की पहली रेजिडेंशियल यूनिवर्सिटी थी। जब यह पहले चला करती थी तब यहा 10000 स्टूडेंट्स और 2000 टीचर्स के रहने की व्यवस्था थी।
- इस यूनिवर्सिटी को आर्किटेक्चरल मास्टरपीस माना जाता है।
- नालंदा में 8 कंपाउंड्स और 10 मंदिर हैं। इसके साथ ही कई मेडिटेशन हॉल और क्लासरूम भी हैं। इसके ग्राउंड्स पर झीलें और बगीचे हैं। वहीं इसकी लाइब्रेरी नौ मंजिला इमारत में है।
- इतिहासिक रिकॉर्ड्स के मुताबिक इस यूनिवर्सिटी को आक्रमणकारियों ने तीन बार तोड़ा था जिसके बाद इसे दो बार ही बनाया गया। पहली बार इसे 455-467 एडी के दौरान तोड़ा गया था।
- उस समय इस यूनिवर्सिटी में हिस्ट्री, लॉ, लिंगुइस्टिक्स, मेडिसिन, पब्लिक हैल्थ, आर्किटेक्चर, मेटेलर्जी, फार्माकोलॉजी, स्कल्पचर और एस्ट्रोनॉमी पढ़ाई जाती थी। यहां कोरिया, जापान, चीन, तिबत, इंडोनेशिया, तुर्की, ग्रीस और पर्शिया से स्टूडेंट्स पढ़ने आया करते थे।

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