पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए गया में होता है श्राद्ध
(India)
गयाजी के प्रभाष क्षेश् में उत्तरमानष वेदी अवस्थित हैं। प्राचीन गयाजी के उत्तर दिशा में उत्तर मानष हैं। धार्मिक मान्यता है कि उत्तरमानष वेदी एवं अंतसलिला फल्गु नदी के पितामहेश्वर घाट पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति एवं मोक्ष प्राप्ति की कामना को लेकर किए गए कर्मकांड के बाद यजमान मौन व्रत धारण कर पंच तीर्थ के अन्य चार वेदियों की ओर निकलते हैं। धार्मिक मान्यता तथा श्रद्धीय तिथि के द्वितीय श्राद्ध के अनुसार बुधवार को तीर्थयात्रियों ने उत्तरमानष, उदिचि, कनखल, दक्षिणमानष एवं जिह्वालोल वेदी पर पिंडदान किया। भगवान गदाधर को पंचामृत से स्नान कराया। काफी संख्या में तीर्थयात्री उत्तरमानष तालाब एवं फाल्गु नदी में अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान व जल तर्पण करते मिले। पंडित विष्णुहरि उपाध्याय फाल्गु नदी में अपने यजमानों को उत्तरमानष व पंचतीर्थ पिंडदान व जल तर्पण की महत्ता बताते मिले। पंडित श्री उपाध्याय ने कहा कि द्वितीय श्राद्ध की तिथि के दिन पंच तीर्थ करने की धार्मिक मान्यता हैं। पांच कोस में स्थित पहला पिंडदान उत्तरमानष में श्रद्धालु अपने पूर्वजों को अपर्ण करते हैं। फिर श्यहांश् से मौन व्रत धारण कर पंच तीर्थ के शेष अन्य चार वेदियों की ओर निकलते हैं। अन्य चार वेदियों में उदिचि, कनखल, दक्षिणमानष एवं जिह्वालोल वेदी या तीर्थ हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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