यह परंपरा 15 दिनों की 'अनासर' अवधि के 12वें दिन निभाई जाती है। मान्यता है कि 'स्नान पूर्णिमा' के अवसर पर 108 पवित्र कलशों के जल से स्नान के बाद भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा अस्वस्थ हो जाते हैं और उन्हें उपचार के लिए 15 दिनों तक एकांत में रखा जाता है।
इस अवधि के दौरान श्रद्धालुओं को तीनों विग्रहों के दर्शन नहीं होते। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उपचार पूरा होने के बाद 'राज प्रसाद बिजे' रस्म के जरिए उनके स्वस्थ होने की सूचना दी जाती है।
यह रस्म भगवान जगन्नाथ की भव्य रथ यात्रा से पहले होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजनों में से एक है। इस वर्ष 16 जुलाई को जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा निकाली जाएगी, जिसमें देश-विदेश से लाखों श्रद्धालुओं के शामिल होने की उम्मीद है।
Author: JAN TV Editorial Team
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