जयपुर के त्रिपोलिया बाजार में स्थित यह शाही ताजिया मुहर्रम की सदियों पुरानी परंपरा और शहर की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है। आमतौर पर मुहर्रम के दौरान निकाले जाने वाले ताजियों को जुलूस के बाद कर्बला में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया जाता है, लेकिन जयपुर के इस शाही ताजिये की परंपरा बिल्कुल अलग है। इसे हर वर्ष जुलूस के बाद वापस लाया जाता है और अगले मुहर्रम तक सुरक्षित रखा जाता है।
शाही ताजिये की देखभाल करने वाले अब्दुल सरताज के अनुसार, यह ताजिया लगभग 150 से 175 वर्ष पुराना है। इसे बनाने में करीब 10 किलोग्राम सोना और 7 किलोग्राम चांदी का उपयोग किया गया था, जो इसे देश के सबसे अनोखे और ऐतिहासिक ताजियों में शामिल करता है।
यह शाही ताजिया केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक ही नहीं, बल्कि जयपुर की पारंपरिक कारीगरी, सांस्कृतिक विरासत और सांप्रदायिक सौहार्द की भी एक अनमोल पहचान है, जिसे आज भी उसी सम्मान और सावधानी के साथ संरक्षित किया जा रहा है।
Author: JAN TV Editorial Team
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