अखाड़े में उस्ताद खड़ा हो तो कसरत करते है | हमने पूजा को भी ऐसी ही एक एक्टिविटी बना दिया है | जबकि पूजा कोई एक्टिविटी नहीं है | वह परमात्मा से सीधे बातचीत करने का माध्यम है | इसके लिए कोई मध्यस्थ की जरुरत नहीं है और ना ही किसी तरह का दबाव होना चाहिए |
दुनिया में हर व्यक्ति को किसी न किसी चीज का डर होता है | पूजा डर से नहीं बल्कि, श्रद्धाऔर आस्था से करनी चाहिए | पूजा करने से मन को शांति मिलती है, डर धीरे धीरे कम होने लगती है और व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है |
हमारे देश में 80 % बच्चे स्कूल से आते ही मोबाइल मांगते है और घरों में खाना खाते समय भी मोबाइल मांगते है | जिस तरह मोबाइल से मन को व्यस्त रखा जा सकता है, उसी तरह पूजा और प्रार्थना से मन को शांत और सकारात्मक रखा जा सकता है |
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