सूर्य भक्ति के सौरपुराण में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा धर्मराज युधिष्ठिर से कही बात इसका प्रमाण भी है। भगवान श्रीकृष्ण के मुताबिक पूरा जगत ही शिव-शक्ति से पूर्ण है और सभी देवी-देवता इस शक्ति के ही अलग-अलग रूप हैं। लिखा गया है कि-
यो ब्रह्मा स हरि: प्रोक्तो यो हरि: स महेश्वर:। महेश्वर: स्मृत: सूर्य: सूर्य: पावक उच्यते।।
पावक: कार्तिकेयोसौ कार्तिकेयो विनायक:। गौरी लक्ष्मीश्च सावित्री शक्तिभेदा: प्रकीर्तिता:।।
देवं देवीं समुद्दिश्य य: करोति व्रतं नर:। न भेदस्तत्र मन्तव्य: शिवशक्तिमयं जगत्।।
सरल शब्दों में अर्थ है कि ब्रह्मा ही विष्णु, विष्णु ही शिव, शिव ही सूर्य, सूर्य ही कार्तिकेय, कार्तिकेय ही गणेश हैं। इसी तरह गौरी, लक्ष्मी और शक्ति भी एक ही हैं। इसलिए जिस भी देवी-देवता की उपासना, व्रत या पूजा करें तो भेदभाव न रखें क्योंकि पूरा जगत ही शिव-शक्ति से पूर्ण है।
Author: JAN TV Editorial Team
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