8 शब्द जिनसे पूरी होती है मनोकामनाएं, दूर हो सकती है कम कमाई की प्रॉब्लम
(India) बहुत सोचने चिंतन-मनन के बाद किसी समस्या के समाधान के लिए जो उपाय निकाला जाता है। उसे भी सामान्य तौर पर मंत्र कह देते हैं। इसे प्राणी और प्रकृति जगत के लिए बहुत शुभ ही प्रभाव देने वाला माना गया है। दरअसल, बीज मंत्रों को देव विशेष का प्रतीक माना गया है। हर बीज मंत्र का अक्षर किसी देवता विशेष से संबंधित होता है और उस देवीय शक्ति का स्त्रोत भी होता है। इसके बोलने से पैदा हुई ध्वनि, सकारात्मक ऊर्जा और प्रभाव पैदा करती है। इसे योग की भाषा में नादयोग भी कहा जाता है। जिसके असर से मानव के अनेक रोग, कष्ट और दु:खों का अंत हो जाता है। हर बीज मंत्र में देवताओं का प्रतीक रूप में आवाहन किया जाता है। इसी कड़ी में गणेश के लिए गं, हनुमान का हं और दुर्गा का दं और राम के लिए रां बीज मंत्र होता है। इन बीज मंत्र के अक्षर और उसका नाद ही अहम शक्ति होती है शास्त्रों में अलग-अलग देवी-देवताओं की प्रसन्नता से कार्य और लक्ष्य सिद्ध करने के लिए बहुत से मंत्र बताए गए हैं। इन मंत्रों में भी बीज मंत्रों का सबसे ज्यादा महत्व बताया गया है। क्या होते हैं बीज मंत्र, क्या और कैसे होता है इनका असर और साथ ही जानिए 8 चमत्कारी बीज मंत्रों से जुड़े रहस्य व प्रभाव, जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं -
दूं- यह दुर्गा का बीज मंत्र है। इसमें द्-दुर्गा, उ- रक्षा और बिंदु- दुखनाशक है। सार है मां दुर्गा रक्षा कर पीड़ाओं का अंत करे।श्रीं - इस लक्ष्मी बीज का मतलब है - श् - महालक्ष्मी, र-दौलत, ई - महामाया, नाद - जगतमाता और बिन्दु- दुखहर्ता । सार है ऐश्वर्य की देवी माता लक्ष्मी मेरे कष्टों को दूर करे और मेरे जीवन में ऐश्वर्य की कमी न हो।
ऐं- यह देवी सरस्वती बीज है, जिसका अर्थ है - ऐ - माता सरस्वती, नाद- जगतमाता व बिंदु- विघ्रनाशक। इस तरह पूरे बीज का मतलब है -जगतजननी मां सरस्वती मुझ पर प्रसन्न हो।
क्लीं- यह श्री कृष्ण का बीज है - जिसमें क - भगवान श्रीकृष्ण, ल- अलौकिक तेज, ई - योगेश्वर और बिंदु-पीड़ानाशक है। पूरे कृष्ण बीज का मतलब है- भगवान श्रीकृष्ण मेरी पीड़ाओं का नाश करे।
क्रीं- यह काली का बीज है- इस मंत्र में क - काली, र-प्रकृति, ई- माया, नाद- जगतमाता व बिंदु- पीडऩाशक है। सार है जगतजननी महाकाली कष्ट का अंत करे।
हौं -यह शिव बीज - इस में ह - शंकर, औ - सदाशिव , बिंदु - पीड़ानाशक है। सार है सदाशिव मेरे संताप का हरण करे।
गं- यह गणेश बीज है - जिसमें में ग्- गणपति, अ - कष्टनिवारण, बिंदु- पीड़ाहर्ता है। पूरे बीज का मतलब है। विघ्रहर्ता भगवान गणेश हमारे दु:खों का अंत करे।

हौं -यह शिव बीज - इस में ह - शंकर, औ - सदाशिव , बिंदु - पीड़ानाशक है। सार है सदाशिव मेरे संताप का हरण करे

Author: JAN TV Editorial Team

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