फूल तोडऩे के पहले हाथ-पैर जल से धोकर आचमन करें और पूर्व दिशा की ओर मुंह कर हाथ जोड़े और नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए फूल विशेष तोड़ें- 
 
मा नु शोकं कुरुष्व त्वं स्थानत्यागं च मा कुरु।
देवतापूजनार्थाय प्रार्थयामि वनस्पते।। 

यही नहीं, शास्त्रों में पहला फूल तोडने पर "ॐ वरुणाय नम:", दूसरा फूल तोड़ते वक्त "ॐ व्योमाय नम:" और तीसरा फूल तोड़ते वक्त "ॐ पृथिव्यै नम:" बोलने का भी विधान बताया गया है।

मंत्र स्मरण के साथ तोड़े गए इन फूलों से शिव की पूजा धन-वैभव व मनोरथ सिद्धि की कामना से करें। माना जाता है कि ऐसी पूजा जल्द ही दरिद्रता का अंत कर सुख व ऐश्वर्य बरसाती है।
(India) शास्त्रों में भी इन पेड़-पौधों की पूजा के साथ-साथ इनसे प्राप्त फूल-पत्ते मंगलकारी बताए जाकर देवताओं को चढ़ाने के विधान है। इसी परंपरा में सावन में शिव को भी कई फूलों का चढ़ावा कार्य और कामना सिद्धि करने वाला माना गया है। किंतु इन फूलों को तोड़ने के लिए विशेष मंत्र का महत्व भी बताया गया है। माना जाता है कि इस मंत्र को बोलकर तोड़े गए फूलों को शिव को चढ़ाने से घर-परिवार में सुख व ऐश्वर्य बढ़ते हैं।
फूल तोडऩे के पहले हाथ-पैर जल से धोकर आचमन करें और पूर्व दिशा की ओर मुंह कर हाथ जोड़े और नीचे लिखा मंत्र बोलते हुए फूल विशेष तोड़ें-
मा नु शोकं कुरुष्व त्वं स्थानत्यागं च मा कुरु।
देवतापूजनार्थाय प्रार्थयामि वनस्पते।।
यही नहीं, शास्त्रों में पहला फूल तोडने पर "ॐ वरुणाय नम:", दूसरा फूल तोड़ते वक्त "ॐ व्योमाय नम:" और तीसरा फूल तोड़ते वक्त "ॐ पृथिव्यै नम:" बोलने का भी विधान बताया गया है।
मंत्र स्मरण के साथ तोड़े गए इन फूलों से शिव की पूजा धन-वैभव व मनोरथ सिद्धि की कामना से करें। माना जाता है कि ऐसी पूजा जल्द ही दरिद्रता का अंत कर सुख व ऐश्वर्य बरसाती है।

Author: JAN TV Editorial Team

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