हमेशा भीतर प्रकट रहते हैं भगवान
(India) परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्। धर्मसंस्थापनार्थाय सम्भवामि युगे युगे ।। 4/8

साधुओं का उद्धार, पापियों का विनाश और धर्म की स्थापना करने के लिए मैं हर युग में प्रकट होता हूं।


इंसान में सत्य के ज्ञान के साथ ही प्रेम का होना भी उनका प्रकट होना है। इंसान में घमंड और राग-द्वेष का होना ही उनको भुलाना है। भगवान को याद करते ही वो हमारे दिलों में प्रकट हो जाते हैं और जब वो प्रकट होते हैं, तब इंसान साधू हो जाता है। साधू का मतलब वह इंसान है, जिसका मन निर्मल है और वह हर पल प्रभु को याद करता है। इंसान पापी तभी होता है, जब वह भगवान को याद नहीं करता और इसके कारण वह मनुष्य से भी नीचे की योनियों में जन्म लेता है। युगों-युगों का अर्थ यह नहीं है कि प्रभु हज़ारों सालों बाद प्रकट होते हैं। युग-युग का अर्थ है, वो पल-पल हमारे भीतर प्रकट होकर हमें पाप कर्म से बचाने और फल की चिंता किए बिना अपने काम में मन लगाने की प्रेरणा देते रहते हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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