(India)
इसके पीछे एक पौराणिक कथा छिपी हुई है । इस कथा के अनुसार एक बार हनुमान जी तपस्या कर रहे थे और वहीं पर शनिदेव पहुंच गए। इसी बीच शनिदेव ने हनुमान जी को युद्ध के लिए ललकारा। इस पर हनुमान जी ने विनम्रतापूर्वक मना कर दिया। उन्होंने कहा कि आप मेरी अराधना में विघ्न ना डालें। शनिदेव ने हनुमान जी को फिर ललकरते हुए कहा कि "मैंने सुना है हिक तुम बहुत बलवान हो, लेकिन मुझे देखते ही तुम्हारी ताकत कहां चली गई। या तो मुझसे युद्ध करो अन्यथा मेरे दास बन जाओ।" इस पर हनुमानजी ने शनिदेव को अपनी पूंछ के पास में फंसा लिया और घूमा-घूमा कर एक पर्वत से दूसरे पर्वत पर दे मारा। इससे शनिदेव का सारा शरीर छलनी हो गया। शरीर पर रगड़ के घावों से त्रस्त शनिदेव ने हुनमान जी से उन्हें मुक्त करने की प्रार्थना की और कहा कि आज से मैं आपकी हर बात मानूंगा। शनिदेव की प्रार्थना सुनकर हुनमानजी बोले कि आज से तुम मेरे किसी भक्त को परेशान नहीं करोगे और उनकी रक्षा करोगे। तब से शनिदेव को तेल चढ़ाया जाता है जिससे उनकी पीड़ा दूर हो और तेल चढ़ाने वाले को शनिदेव की कृपा प्राप्त हो।
Author: JAN TV Editorial Team
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