(India)
कैम्ब्रिज से पढ़े साराभाई का जन्म 12 अगस्त 1919 को अहमदाबाद में हुआ था। सन1940 में प्राकृतिक विज्ञान में कैम्ब्रिज से ट्राइपोज डिग्री हासिल की। फिर भारत लौटकर उन्होंने बेंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान में नौकरी की, जहां वे सी.वी.रमण के निरीक्षण में कॉसमिक रेज पर अनुसंधान करने लगे। साराभाई ने 86 वैज्ञानिक शोध पत्र लिखे एवं 40 संस्थान खोले। इनको विज्ञान एवं अभियांत्रिकी के क्षेत्र में सन 1966 में भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। उनके नाम को भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम से अलग नहीं किया जा सकता। यह जगप्रसिद्ध है कि वह विक्रम साराभाई ही थे जिन्होंने अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भारत को अंतर्राष्ट्रीय मानचित्र पर स्थान दिलाया । साराभाई ने संचार, मौसम विज्ञान, मौसम संबंधी भविष्यवाणी और प्राकृतिक संसाधनों के लिए अन्वेषण आदि शामिल हैं । डॉ. साराभाई द्वारा स्थापित भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला, अहमदाबाद ने अंतरिक्ष विज्ञान में और बाद में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में अनुसंधान का पथ प्रदर्शन किया । साराभाई ने देश की रॉकेट प्रौद्योगिकी को भी आगे बढाया । उन्होंने भारत में उपग्रह टेलीविजन प्रसारण के विकास में भी अग्रणी भूमिका निभाई । डॉ. साराभाई का देहांत कोवलम, तिरूवनंतपुरम (केरल) में 30 दिसम्बर, 1971 को हुआ था। इस महान वैज्ञानिक के सम्मान में तिरूवनंतपुरम में स्थापित थुम्बा इकेटोरियल रॉकेट लाउंचिंग स्टेशन (टीईआरएलएस) और सम्बद्ध अंतरिक्ष संस्थाओं का नाम बदल कर विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्द्र रख दिया गया। यह भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के एक प्रमुख अंतरिक्ष अनुसंधान केन्द्र के रूप में उभरा है। 1974 में सिडनी स्थित अंतर्राष्ट्रीय खगोल विज्ञान संघ ने निर्णय लिया कि "सी ऑफ सेरेनिटी" पर स्थित बेसल नामक मून क्रेटर अब साराभाई क्रेटर के नाम से जाना जाएगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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