शंख की करें पूजा, बनाता है धन-धान्य से संपन्न
(India) दरअसल आपको जरूरत है दक्षिणावर्ती शंख जिसे लक्ष्मी स्वरूप ही माना गया है। इसे बिना सिद्ध किए घर में रखा जाए तो भी लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। शुक्रवार के दिन शंख को साफ धोकर इसमें शुद्ध जल भरकर पूजन करने से समृद्धि प्राप्त होती है। साथ ही शंख में भरा जल पीना और छिड़कना बेहद अच्छा माना जाता है।
शुक्रवार को करें ये उपाय बरसेगी माता लक्ष्मी की कृपा...
भगवान विष्णु ने शिव जी को राक्षस का वध करने के लिए धनुष दिया। इस त्रिशुल के माध्यम से शिव जी ने इस राक्षस का संहार किया। जिसके बाद उसे भगवान ने समुद्र में डाल दिया। यह शंखचूड़ के रूप में उत्पन्न हुआ। इसे शंखचूड़ नामक शंख के नाम से जाना जाता है। इसके साथ ही बाद में छोटे, बड़े अलग-अलग आकार के शंख समुद्र से मिले। सामान्यतौर पर शंख दो प्रकार से प्रचलित होते हैं। दक्षिणावर्त और वामावर्त शंख। दक्षिणावर्त को दो प्रकार से जाना जाता है जिसे पुरूष और स्त्री शंख कहा जाता है। जिस श्ंख की मोटी परत होती है और जो भारी होता है उसे पुरूष शंख कहा जाता है। पतली परत वाली को स्त्री शंख कहा जाता है। भगवान विष्णु का शंख पांचजन्य माना जाता है। जिसे उन्होंने महाभारत के युद्ध में बजाया था।
क्यों है लक्ष्मी जी को प्रिय
दरअसल भगवान विष्णु का साकार स्वरूप शंख, चक्र, गदा और पद्मधारण किए हुए चर्तुभुज है। ऎसे में जब भगवान विष्णु को शंख प्रिय है तो लक्ष्मी जी को भी यह प्रिय होता है। शुक्रवार के दिन पूजन में शंख की स्थापना करना बेहद शुभकारी माना जाता है।

Author: JAN TV Editorial Team

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