नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन ने बुधवार को कहा कि भारत में सहनशीलता की सख्त जरूरत है। इसके अलावा उन्होंने संदिग्ध सहनशीलता के महत्व को भी रेखांकित किया। सेन तत्कालीन प्रेसिडेंसी कॉलेज के पूर्व छात्र हैं जो अब प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय बन चुका है। उन्होंने 19वीं सदी के कवि हेनरी लुईस विवियन डेरोजियो के शिक्षा और समाज पर योगदान की चर्चा करते हुए कहा, सामान्य सोच यह है कि किसी भी तरह के विश्वास को स्वीकार करना चाहिए। सहनशीलता एक बहुत बड़ा नैतिक गुण है और भारत में इस वक्त इसकी बेहद सख्त जरूरत है। उन्होने कहा कि भारत में संदिग्ध सहनशीलता की भी जरूरत है। जो डेरोजियो के विभिन्न विचारों में से एक है। उनकी किसी समूह से दुश्मनी नहीं थी, लेकिन हरेक समूह के लिए उनके पास प्रश्न था। सेन को प्रेसिडेंसी विश्वविद्यालय में यहां डीलिट् की मानद उपाधि से सम्मानित किया गया।
Author: JAN TV Editorial Team
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