यह बयान 19 सितम्बर को हसन जिले के सकलेशपुर में आयोजित एक जन-शिकायत बैठक के दौरान सामने आया। बैठक में मौजूद एक किसान ने मंत्री के बयान में सवाल उठाते हुए कहा कि अधिकारियों को सरकार वेतन देती है, तो फिर जनता उन्हें अलग से पैसे क्यों दें?
किसान और वहां मौजूद कुछ अन्य लोगों ने इस बयान का विरोध किया इसके बाद बैठक में बहस शुरू हो गयी और माहौल तनावपूर्ण हो गयी।
विवाद बढ़ने पर मंत्री ने सफाई देते हुए कहा कि उनका मकसद ईमानदारी से काम करने वाले अधिकारियों की सहारना करना था। उन्होंने ये भी कहा कि वह रिश्वत देने की बात नहीं कर रहे थे और किसी अधिकारी को जबरदस्ती पैसे नहीं लेने चाहिए ।
भाजपा के मंत्री इस बयान पर कांग्रेस सरकार पर निशाना साधा। बीजेपी नेता सीटी रवि ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार रिश्वत के खिलाफ है, तो मंत्री अधिकारियों को सम्मान के नाम कर पैसे देने की बात क्यों कर रही है।
मामले पर हासन की डिप्टी कमिश्नर केएल लता कुमारी ने लोगों को शांत करने की कोशिश की और उन्होंने कहा कि अगर कोई अधिकारी काम करने के बदले रिश्वत मांगता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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