देशभर के भाजपा कार्यकर्ताओं को वर्चुअली संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, 7 अक्टूबर 2001 को जब मैंने गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी, तब मैंने नहीं सोचा था कि एक दिन सार्वजनिक जीवन में यह पड़ाव भी आएगा। आज सरकार के प्रमुख के रूप में निरंतर देश की सेवा करते हुए मुझे 25 साल पूरे हो गए हैं। यह जनता-जनार्दन के आशीर्वाद का परिणाम है।
उन्होंने भारत के लोकतंत्र और संविधान को भी नमन किया। उन्होंने आगे कहा, आज मैं जो कुछ भी हूं और जिस भी दायित्व पर हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता-जनार्दन का ही है।
प्रधानमंत्री ने जनता-जनार्दन को ईश्वर का स्वरूप बताते हुए कहा, करोड़ों लोगों का विश्वास ही मेरी शक्ति रहा है। देश ने मुझे बहुत कुछ दिया है, इसलिए देश ही मेरे लिए सब कुछ है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के नागरिकों का ही उन पर सबसे बड़ा हक है।
पीएम मोदी ने 25 साल का जनविश्वास और अनुभव अपनी बड़ी पूंजी बताते हुए कहा, यह पूंजी देश की है और मां भारती की हर संतान इसकी अधिकारी है। उन्होंने अपने स्कूली दिनों को याद करते हुए कहा कि सीखने की ललक उनके जीवन का हिस्सा बन गई है। मैं आज भी खुद को एक विद्यार्थी मानता हूं। मैं ईश्वर से यही मांगता हूं कि सीखने की मेरी ललक कभी खत्म न हो।
लोकतंत्र की शक्ति को समझाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पीछे मुड़कर देखने पर उनके मन में कृतज्ञता का भाव आता है। उन्होंने कहा, मुझे हर घटना ने कुछ न कुछ सिखाया है। हर संकट ने मेरे धैर्य की परीक्षा ली, जबकि हर सफलता ने बड़े लक्ष्यों की ओर बढ़ने का सामर्थ्य दिया।
पीएम मोदी ने आगे कहा, हमने इस राष्ट्र में जन्म लिया है—यह एहसास ही अमृत है। 25 वर्षों का आकलन इससे नहीं होता कि मैं कहां पहुंचा, बल्कि इससे होता है कि देश कहां पहुंचा।
Author: JAN TV Editorial Team
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