प्रभावित इलाकों में करीब 20 पानी के टैंकर और 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल उपलब्ध कराया गया है। जलभराव प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं। इनमें दाउद नगर में 10 तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक रैन बसेरा शामिल है। जोन-6 में करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 26 लोग रैन बसेरों में रह रहे हैं।
इसके अलावा पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। रैन बसेरों में बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, प्रकाश व्यवस्था और मोबाइल चार्जिंग के लिए 12 चार्जिंग पॉइंट की सुविधा दी गई है।
राहत कार्यों के तहत जिला प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हैं। नगर निगम की टीमें राहत सामग्री की लोडिंग, अनलोडिंग और वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रही हैं। दाउद नगर में दो शिफ्टों में 25-25 कर्मचारियों तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में 25-25 कर्मचारियों को लगाया गया है।
जोन-6 के सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों में नावों एवं स्टीमर से लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी है। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे राहत सामग्री वितरण के लिए एक नाव विशेष रूप से लगाई गई है।
स्वच्छता एवं बीमारी से बचाव के लिए यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है।
जलभराव वाले ऐसे स्थानों, जहां सामान्य मशीनों से पहुंचना मुश्किल है, वहां ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया जा रहा है। छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के अलावा एलएसए की दो बड़ी मशीनों से भी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।
नगर आयुक्त ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती युनिवर्सिटी में बनाए गए अस्थायी भंडार केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने उपलब्ध राहत सामग्री और अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था देखी तथा सामग्री के व्यवस्थित रख-रखाव और जरूरत के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों तक समय से पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।
नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौजूदा राहत कार्यों के साथ जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी भी पूरी रखी जाए। प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें निर्धारित की जा रही हैं। पानी उतरते ही इन टीमों द्वारा सड़कों और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे एवं गंदगी की सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर, एंटी लार्वा और आवश्यक दवाओं का छिड़काव तथा फॉगिंग कराई जाएगी। इसका उद्देश्य जलभराव के बाद संक्रामक एवं मच्छरजनित बीमारियों के संभावित प्रसार को नियंत्रित करना है।
Author: JAN TV Editorial Team
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