जेएनयू मुद्दे में देशद्रोह विरोधी कानून का इस्तेमाल करने के बाद हुए हंगामे को देखते हुए भारत सरकार राष्ट्रद्रोह कानून की समीक्षा कर रही है। गृह मंत्रालय ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि लॉ कमीशन इस कानून के कुछ हिस्सों की समीक्षा कर रहा है। सरकार के कानून मंत्रालय ने लॉ कमीशन से कहा है कि भारत में धारा 124 (ए) के इस्तेमाल पर स्टडी की जाए। उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2014 में लॉ कमीशन ने कहा था कि देशद्रोह कानून में उन्होंने देशद्रोह कानून में बदलाव के लिए कुछ खास बिंदुओं की पहचान की है। संसद ने पिछले सप्ताह ही कांग्रेस सांसद शशि थरूर के देशद्रोह कानून के 124 (ए) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। थरूर ने कहा है कि, श्इसमें कोई शक नहीं है कि जेएनयू की घटना ने लोगों का ध्यान देशद्रोह कानून की ओर खींचा है। उन्होंने कहा कि हो सकता है कि इस घटना के बाद कुछ लोगों की राय और भी कठोर हो गई हो लेकिन इसके साथ ही इस घटना ने देशद्रोह कानून के दुरुपयोग की ओर भी ध्यान दिलाया है। मुझे उम्मीद कि इससे देशद्रोह कानून के मसले पर चर्चा होगी। थरूर ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि ब्रिटिश काल में महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, ऐनी बेसेंट और बाल गंगाधर तिलक जैसे स्वतंत्रता सेनानियों पर देशद्रोह का केस लगाया गया था।
Author: JAN TV Editorial Team
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