इशरत मामले में सतीश वर्मा ने मणि के आरोपों को नकारा
(India)
इशरत जहां मुठभेड़ मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं। इस मामले की जांच से जुडे रहे एसआईटी के पूर्व अधिकारी सतीश वर्मा ने गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे आर वी एस मणि को सिगरेट से दागने के आरोप को निराधार बताया है। उन्होंने गुरुवार को कहा कि सीबीआई जांच के समय ऐसी कोई घटना नहीं हुई थी। अगर ऐसा मैंने किया होता तो यह एक अपराध है। मणि को यह बात अच्छे से पता है कि अगर ऐसा हुआ था तो वह उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कर सकते थे। उन्होंने मणि के सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मणि का उद्देश्य कुछ और है। वह केस को कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस जांच में गवाह के बयान रिकॉर्ड किए जाते हैं। उसमें उनके हस्ताक्षर नहीं लिए जाते हैं। मणि भी गवाह थे, तो उनका जो बयान लेना था उस पर हस्ताक्षर नहीं होता है। तो फिर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव का प्रश्न नहीं है। वर्मा के बयान पर मणि ने कहा कि उनके पास आज भी वह पैंट सबूत के तौर पर मौजूद है, जब वर्मा ने उनको सिगरेट से दागा था। गौरतलब है कि गृह मंत्रालय में अवर सचिव रहे आर वी एस मणि ने एक साक्षात्कार में कहा था कि इशरत जहां केस में उन्होंने दो हलफनामे दाखिल किये थे। इंटरव्यू में मणि ने आरोप लगाया कि उन्हें मामले में वरिष्ठ आईबी अधिकारियों को फंसाने के लिए प्रताड़ित किया गया था, ताकि यह पेश किया जा सके कि इशरत और अन्य तीन लश्कर आतंकवादियों के साथ 2004 में अहमदाबाद में हुई मुठभेड़ फर्जी थी। मणि का कहना था कि दूसरा हलफनामा दाखिल करने के फैसले के पीछे चिदंबरम थे। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन एसआईटी प्रमुख (सतीश वर्मा), जो एक सीबीआई अधिकारी हैं, उनके पीछे पड़े थे और इशरत तथा अन्य आतंकवादियों पर खुफिया एजेंसियों द्वारा दी गई पेशेवर जानकारी की गुणवत्ता पर सवाल खड़ा करने का प्रयास किया गया।

Author: JAN TV Editorial Team

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