रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को कहा कि अगले वित्त वर्ष के दौरान करीब एक लाख करोड़ रुपये के रक्षा सौदों को मंजूरी दी जाएगी। इसमें राफेल डील भी शामिल है। बजट में इसके लिए पर्याप्त प्रावधान किए गए हैं। पर्रिकर ने रक्षा बजट को लेकर संवाददाताओं से कहा कि कुल बजट का 19.78 फीसदी यानी 3.41 लाख करोड़ रुपये रक्षा क्षेत्र के लिए आवंटित किए गए हैं। इसमें 82 हजार करोड़ रुपये पूर्व सैनिकों की पेंशन के लिए आवंटन है। उन्होंने कहा कि माउंटेन स्ट्राइक कोर के लिए अलग से आवंटन नहीं किया गया है। लेकिन रक्षा बजट से ही इसके गठन का कार्य चल रहा है। इस पर 26-28 हजार करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है तथा हम प्रतिवर्ष करीब डेढ़-दो हजार करोड़ रुपये इसके गठन पर खर्च कर रहे हैं। पर्रिकर ने कहा कि रक्षा साजो-सामान की खरीद के लिए 70 हजार करोड़ रुपये रखे गए हैं। पिछली बार 77 हजार करोड़ आवंटन हुआ था और 66 हजार करोड़ खर्च हुए थे। इस राशि से उन रक्षा सौदों की किश्तें चुकाई जाएंगी जो पूर्व में हो चुके हैं या वित्त वर्ष के दौरान होंगे। चूंकि भुगतान टुकड़ों में करना होता है, इसलिए यह राशि पर्याप्त है। इस राफेल डील होने पर इस राशि से ही उसका आरंभिक भुगतान किया जाएगा। सौदे के बारे में उन्होंने कहा कि वे मंझे हुए खरीददार हैं और देश का पैसा बचाने में लगे हैं। रक्षामंत्री ने कहा कि सैन्य बलों में अनावश्यक खर्चों में कमी लाने और ऑटोमेशन को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बलों को इस बारे में कहा गया है। जैसे, ड्राइवरों, पायलटों आदि प्रशिक्षण आदि में यथासंभव सिमुलेटर का इस्तेमाल करने के लिए कहा गया है ताकि ट्रेनिंग के खर्च को सीमित किया जा सके। पार्रिकर ने कहा कि सैन्य बलों के आधुनिकीकरण के दौरान चालू वित्त वर्ष में 1.2 लाख करोड़ के सौदों को मंजूरी दी गई। जबकि 32 हजार करोड़ रुपये के रक्षा सौदे अंतिम चरण में हैं। उन्हें मंजूरी की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। मनोहर पर्रिकर ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में अन्य देशों के साथ संयुक्त समुद्री गश्त की संभावना को खारिज कर दिया। कुछ ही दिन पहले अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य कमांडर ने निकट भविष्य में संयुक्त गश्त की संभावना जताई थी। पर्रिकर ने कहा कि भारत संयुक्त सैन्य अभ्यास के लिए तो तैयार है, लेकिन संयुक्त गश्त के लिए नहीं।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।