‘स्मृति ईरानी मदद करतीं तो पापा जिंदा होते’
(India)

यमुना एक्सप्रेस वे पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के काफिले की गाड़ी की टक्कर से एत्मादपुर निवासी रमेश नागर की मौत हो गई। मौत का वह मंजर रह-रहकर उनके बच्चों को परेशान कर रहा है। जख्मी 12 वर्षीय बेटी संदली बोल रही है कि केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी मदद करतीं तो पापा जिंदा होते। वह तो उन्हें सड़क पर तड़पता हुआ छोड़कर कार में बैठकर चली गईं। 5 मार्च की रात यमुना एक्सप्रेस वे पर वृंदावन कट के पास एत्मादपुर निवासी रमेश नागर की हादसे में मौत हो गई थी। उनकी बेटी संदली और भतीजा पंकज हादसे में जख्मी हुए थे। रमेश के बेटे अभिषेक नागर की तहरीर पर मथुरा के मांट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था। गमगीन माहौल में रविवार को एत्मादपुर में रमेश का अंतिम संस्कार हुआ था। हादसे में जख्मी बेटी संदली अभी भी दर्द से छटपटा रही है। पापा नहीं रहे यह गम उसे सताए जा रहा है। वह एक ही बात बोल रही है कि स्मृति ईरानी ने मदद की होती तो पापा भी उनके बीच होते। अब उसके पापा को कौन वापस लेकर आएगा। उसे स्कूल कौन छोड़ने जाएगा। उसे कहानियां कौन सुनाएगा। मासूम बच्ची के दर्द भरे सवालों ने रिश्तेदारों की आंखें नम कर दी हैं। पूरा परिवार रह-रहकर केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी को कोस रहा है। सभी बोल रहे हैं कि कोई लापरवाह व्यक्ति एक्सीडेंट के बाद भागे तो समझ में आता है, लेकिन केंद्रीय मंत्री से ऐसे आचरण की उम्मीद कोई कैसे कर सकता है। जनता की मदद के लिए उन्हें मंत्री बनाया गया है। रमेश नागर के पिता पौप सिंह बहुत दुखी हैं। उनका कहना है कि मुकदमे से क्या होता है। बेटा चला गया, बहू विधवा हो गई। बच्चे जख्मी हैं।

Author: JAN TV Editorial Team

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