सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों में तस्वीरों के इस्तेमाल से संबंधित अपने पूर्व के आदेश में शुक्रवार को संशोधन करते हुए राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों एवं कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल करने की अनुमति दे दी। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई एवं न्यायमूर्ति प्रफुल्ल चंद पंत की पीठ ने कर्नाटक, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु एवं कुछ अन्य राज्य सरकारों की पुनर्विचार याचिकाएं स्वीकार करते हुए यह आदेश दिया। न्यायालय ने इन विज्ञापनों में राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों एवं कैबिनेट मंत्रियों को भी शामिल करने का आदेश दिया। पहले उसने सरकारी विज्ञापनों में केवल राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की तस्वीर प्रकाशित करने का आदेश दिया था, वह भी उनकी अनुमति लेकर ही। पुनर्विचार याचिका दायर करने वालों में पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, असम और ओडिशा की सरकारें भी शामिल थीं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी विज्ञापनों में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के अलावा किसी भी तस्वीर के प्रकाशन पर रोक लगा दिया था। इस फैसले के खिलाफ फिर सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने दलील दी थी। अटार्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने दलील दी कि हर मंत्री अपने अपने विभाग में कार्य करता है फिर भला वह सरकारी विज्ञापनों में अपने काम के बारे में अपनी जनता को क्यों न बताएं।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।