राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली में 2000 सीसी इंजन क्षमता तथा इससे ऊपर की डीजल एसयूवी और कारों के रजिस्ट्रेशन पर लगे प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट छह माह के लिए और बढ़ा दिया। कोर्ट ने प्रतिबंध बढ़ाते हुए संकेत दिया कि ऐसी कारों की खरीद पर एक मुश्त प्रदूषण सेस लगाया जा सकता है जो कार की कीमत का 10 से 15 फीसदी तक हो सकता है। जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली विशेष पीठ ने गुरुवार को डीजल कार डीलर्स एसोसिएशन से कहा कि डीजल एक प्रदूषक ईंधन है, इसके बारे में कोई संदेह नहीं है। बड़ी कारों पर बैन हटाने का आग्रह कर रहे एसोसिएशन से कोर्ट ने कहा कि डाक्टर ने नहीं बताया है कि आदमी डीजल की कार में ही चले। क्या इससे ब्लड पे्रशर या शुगर कम हो जाती है। आखिर आपको क्यों दूसरे लोगों के जीवन को कष्टदायक बनाने की अनुमति जाए। यदि आप ऐसा करते हैं तो आपको कुछ तो चुकाना ही चाहिए। एसोसिएशन ने जब बताया कि बड़ी कारें ज्यादा इंधन कुशल हैं तो कोर्ट ने पलट कर सवाल किया कि 50 लाख की कार चलाने वाला व्यक्ति यह कार उसकी ईंधन कुशलता देखकर नहीं खरीदता। यह कारें सुपररिच और कारपोरेट के लोग खरीदते हैं जिन्हें 50 लाख की कार पर पांच लाख रुपये का प्रदूषण सेस देने में कोई आपत्ति नहीं होगी। आप यह सब मत बताइये, आखिर आप भी जब एसोसिएशन की पैरवी करके बाहर निकलेंगे तो आपको को भी वही हवा का सामना करना पड़ेगा जो दूसरे कर रहे हैं। इसलिए कारों के सैल्समैन मत बनिये वातावरण का भी ध्यान रखिए।
Author: JAN TV Editorial Team
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