केजरीवाल सरकार ने मंगलवार को हाईकोर्ट से उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री के बीच अधिकारों को लेकर जारी विवाद की सुनवाई के लिए बड़ी पीठ गठित करने की मांग की है। सरकार ने कहा है कि चूंकि इसमें संवैधानिक सवाल जुड़ा हुआ है, इसलिए मामले की सुनवाई बड़ी पीठ के समक्ष होनी चाहिए। चीफ जस्टिस जी. रोहिणी और जस्टिस जयंत नाथ की पीठ के समक्ष इसलिए दिल्ली सरकार ने अर्जी दाखिल की है। यही पीठ पहले से इस मामले की सुनवाई कर रही है। सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जय सिंह, राजीव दत्ता, एच.एस. फुल्का व अन्य ने कहा कि दरअसल यह मामला संविधान के अनुच्छेद 239एए की व्यख्या से जुड़ा होने के साथ-साथ जनहित के लिए बहुत ही महत्यपूर्ण है। इसलिए, मामले की सुनवाई के लिए बड़ी पीठ (जिसमें तीन या पांच जज हो) गठित की जानी चाहिए। केजरीवाल सरकार ने कि केंद्र सरकार संविधान के अनुच्छेद 239एए को इस तरह से व्यख्या करने की कोशिश कर रही है कि केंद्र ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली की सरकार है। केजरीवाल सरकार ने कहा कि यदि केंद्र के इन दलीलों को स्वीकार किया गया तो फिर लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई दिल्ली सरकार का मतलब शून्य रह जाएगा।
Author: JAN TV Editorial Team
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