एक अप्रैल से राज्य में शराबबंदी लागू होने के बाद महिलाएं काफी राहत में हैं। महिला आयोग में भी शिकायतों में कमी आई है। शराबबंदी के असर का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि महिला आयोग से लेकर महिला थाने में पिछले पांच दिन में शराब पीकर पीटने की एक भी घटना की शिकायत महिलाओं ने नहीं की है। एक अप्रैल से पहले हर दिन सिर्फ महिला आयोग में अमूमन तीन से चार मामले आते थे। शराब से सबसे अधिक महिलाएं परेशान थीं। पति पिये तो जिन्दगी बर्बाद, बेटा पिये तो उसकी ममता पर सवाल। यानी हर हाल में महिलाएं निशाने पर। एक अप्रैल से राज्यभर में शराबबंदी की घोषणा होते ही महिलाओं ने सुकून की सांस ली। महिला आयोग की अध्यक्ष अंजुम आरा ने बताया एक अप्रैल से शराब के नशे में पीटने का मामला तो कम हुआ ही है, घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना के मामलों में भी कमी आयी है। महिलाएं आयोग व महिला थाने में शिकायत करती थीं कि उसका पति शराब के नशे में पीटता है। दिन-रात शराब के नशे में चूर रहता है। यहां तक कि घर खर्च भी नहीं देता है। राष्ट्रीय अपराध ब्यूरो के आंकड़े भी बताते हैं कि महिलाओं पर होने वाली 80 प्रतिशत हिंसक घटनाएं शराब के नशे में होती हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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