बाबरी कमेटी अड़ी जिलानी ने कहा स्वामी से नहीं होगी कोई बात
(Lucknow, Lucknow) अयोध्या विवाद पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा सुलह समझौते की पहल पर इस विवाद से जुड़े हिन्दू पक्ष ने असहमति जताई है। दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष का कहना है कि उन्हें सुप्रीम कोर्ट पर पूरा भरोसा है। विवाद के एक प्रमुख पक्षकार राम लला विराजमान के वकील मदन मोहन पाण्डेय ने 'हिन्दुस्तान' से बातचीत में कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद के निपटारे के लिए किसी भी संबंधित पक्ष ने समझौते के बाबत सुप्रीम कोर्ट में कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया है। पाण्डेय का तर्क है कि सीपीसी के सेक्शन 89 में यह प्रावधान तो है कि अदालत सभी पक्षों से किसी मसले पर अपनी राय व्यक्त करने को कहा सकती है मगर वह समझौते के लिए बाध्य नहीं कर सकती।
उन्होंने हाईकोर्ट लखनऊ के तीन जजों की बेंच द्वारा वर्ष 2010 में दिए गए फैसले के हवाले से कहा कि अदालत ने भी यह माना है कि विवादित ढांचे के मुख्य गुम्बद वाली जमीन रामलला का जन्मस्थान है। उन्होंने कहा कि अगर अन्य पक्षों की तरफ से कोई प्रस्ताव आता है तो रामलला विराजमान की तरफ से उस पर विचार किया जा सकता है मगर समझौता किसी भी सूरत में मंजूर नहीं होगा।

Author: JAN TV Editorial Team

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