संभवतः आज इस बात के साफ होने की उम्मीद की जा रही है कि आडवाणी जोशी और उमा समेत 13 लोगों के खिलाफ फिर से केस चलाया जाएगा या नहीं।
जस्टिस पीसी घोष और आरएफ नारीमन की पीठ ने इस साल 6 मार्च को हुई सुनवाई में कहा था कि तकनीकी आधार पर 13 व्यक्तियों को आरोपमुक्त किया गया था। वे तकनीकी आधार पर आरोपमुक्त करना स्वीकार नहीं करेंगे और पूरक आरोपपत्र की अनुमति देंगे।
पीठ ने कहा था दोनों मुकदमों को क्यों नहीं एक साथ कर देते और इनकी संयुक्त रूप से सुनवाई करवाएं। इस पर बचाव पक्ष के वकील ने आपत्ति जताई। पहला मामला विवादित ढांचा गिराए जाने मामले में भाजपा नेताओं सहित 13 व्यक्तियों को आपराधिक साजिश के आरोप से मुक्त कर दिया गया था। इसकी सुनवाई रायबरेली की विशेष अदालत में हो रही है।
दूसरा मामला अज्ञात कारसेवकों के खिलाफ है जो विवादित ढांचे के ईद-गिर्द थे। इस मुकदमे की सुनवाई लखनऊ में हो रही है। मालूम हो कि विवादित ढांचा गिराने के मामले में भाजपा नेता आडवाणी, जोशी और 19 अन्य के खिलाफ साजिश के आरोप खत्म करने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के 2010 के आदेश के खिलाफ सीबीआई ने अपील दायर की थी।
Author: JAN TV Editorial Team
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