सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की बढ़ेगी मुश्किल..वसुंधरा सरकार ने सीबीआई जांच के लिए लिखा
(Jaipur, Jaipur) कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा की जमीन से जुड़े मामले में मुश्किलें और अधिक बढ़ सकती है । राजस्थान सरकार ने बीकानेर महाजन फिल्ड फाय¨रग रेंज में हुए जमीन घोटाले से जुड़ी सभी 18 मुकदमों की जांच सीबीआई को सौंप दी है । राज्य के गृह विभाग ने इस मामले की जांच का पत्र सीबीआई को भेज दिया,हालांकि यह पूरा मामला पूरी तरह से गोपनीय रखा गया है । सीबीआई को भेजे पत्र के साथ प्रदेश के राजस्व विभाग का रिकॉर्ड,फाय¨रग रेंज के विस्थापितों के बयानों सहित कुछ अन्य दस्तावेज भी भेजे गए हैं । इस मामले की ईडी पहले ही जांच की चुकी है । ईडी ने इस मामले से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज जुटाने का दावा किया था । इससे पहले राज्य की सत्ता संभालने के कुछ माह बाद ही मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस प्रकरण की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी का गठन किया था ।

इस कमेटी ने वाड्रा को निर्दोष बताया था,कमेटी की ओर से सरकार को सौंपी रिपोर्ट में कहा गया था कि वाड्रा की कम्पनी ने जो जमीन खरीदी वह विस्थापितों द्वारा बेची गई थी,कम्पनी को इस बात की जानकारी नहीं थी कि विस्थापितों ने पहले ही मुआवजा ले लिया,ये बेचने योग्य जमीन नहीं हैं । इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं । अगले वर्ष होने वाले राज्य विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और गांधी परिवार को घेरने के लिए भाजपा के पास इससे बड़ा मुद्दा हो नहीं सकता है । इस मुद्दे को लेकर भाजपा के आरोपों का जवाब देना कांग्रेस के लिए मुश्किल हो सकता है । बीकानेर के महाजन फिल्ड फाय¨रग रेंज में गलत ढंग से आवंटित 275 बीघा जमीन हिस्सा वाड्रा की कम्पनी स्काईलाट हॉस्पिटैलिटी द्वारा खरीदी गई थी ।

उल्लेखनीय है कि यह पूरा जमीन घोटाला बीकानेर के कोलायत में महाजन फिल्ड़ फाय¨रग रेंज के विस्थापितों के नाम से फर्जी आवंटन से जुड़ा है। यहां जिन लोगों के नाम पर जमीनों का आवंटन हुआ था,वे असलियत में थे ही नहीं । कुछ लोगों ने क्षेत्र के तत्कालीन तहसीलदार,नायब तहसीलदार,पटवारी सहित अन्य सरकारी कर्मचारियों से मिलकर जमीनों का वर्ष 2006-07 में जमीनों का नामांतरण करा लिया,फिर इन जमीनों के बेचने का सिलसिला शुरू हुआ । इसी के तहत रॉबर्ट वड्रा की कम्पनी स्काइलाइट्स ने भी पहले 150 बीघा और फिर 125 बीघा जमीन खरीदी । इस मामले का खुलासा वर्ष 2010 में हुआ,लेकिन वाड्रा से जुड़ा मामला होने के कारण तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने इस मामले ठंडे बस्ते में ड़ाल दिया । इसके बाद राज्य में सरकारी बदली और वसुंधरा राजे के सत्ता संभालने के कुछ माह बाद ही वर्ष 2014 में इस मामले में पुलिस में केस दर्ज हुए ।

इनमें चार केस वाड्रा की कम्पनी से जुड़े हुए हैं । पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चालान पेश करने के साथ ही जांच लंबित रख दी । लंबित जांच में वाड्रा की कम्पनी की कम्पनी की भूमिका भी है । यह आरोप है कि वाड्रा की कम्पनी ने कोलायत में राजस्व विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों से मिलीभगत कर मात्र 79 लाख रूपए में 275 बीघा जमीन खरीदी ।

Author: JAN TV Editorial Team

DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।