राज्य के गृहमंत्री गुलाब चंद कटारिया का कहना है कि सीबीआई ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। सीबीआई के अधिकारियों ने इस बारे में राज्य के गृह सचिव से कुछ आवश्यक सूचनाएं भेजने को कहा है । राज्य सरकार ने इस मामले को लेकर बीकानेर के कोलायत और गजनेर पुलिस थानों में दर्ज 18 एफआईंआर की जांच सीबीआई से कराने के सिफारिशी पत्र के साथ राजस्व विभाग का रिकॉर्ड भी भेजा था । इन 18 में से 4 एफआईआर वाड्रा की कम्पनी से भी जुड़ी हुई थी ।
कोलायत क्षेत्र में जमीन आवंटन हुए घोटाले में से 275 बीघा जमीन रॉबर्ट वाड्रा की कम्पनी स्काइ लाइट हॉस्पिटैलिटी ने खरीदी थी । उल्लेखनीय है कि महाजन फिल्ड़ फायरिंग रेंज के विस्थापितों को जमीन का आंवटन किए जाने के दौरान फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्जी लोगों ने जमीनें अपने नाम आवंटित करा ली और फिर इनका बेचान करते रहे । जमीनों के फर्जी आवंटन एवं बेचान में भूमाफियाओं के साथ राजस्व एवं जिला प्रशासन से जुड़े अधिकारी एवं कर्मचारी भी शामिल रहे ।
फर्जी दस्तावेजों के आधार पर आवंटित एवं बाद में बिकी जमीन में से ही 275 बीघा जमीन रॉबर्ट वाड्रा की कम्पनी ने वर्ष 2010 में खरीदी थी । इसमें 150 बीघा जमीन एक स्थान पर एवं 125 बीघा जमीन दूसरे स्थान पर खरीदी गई थी ।वाड्रा की कम्पनी यहां सोलर पॉवर प्लांट लगाना चाहती थी,लेकिन बाद में वर्ष 2012 में इस जमीन को बेच दिया गया । राज्य गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि विस्थापितों के नाम पर फर्जी आवंटन और बेचान का खेल वर्ष 2006 से शुरू हुआ और इसका खुलासा वर्ष 2010 में हुआ था ।
वाड्रा पर आरोप यह है कि उनकी कम्पनी ने सरकारी अधिकारियों से मिलीभगत कर मात्र 79 लाख रूपए में यह जमीन खरीदी और फिर ऊंचे भावों में बेच दी । जिस समय यह जमीन वाड्रा की कम्पनी ने खरीदी थी उस समय राज्य में कांग्रेस की सरकार थी ।
Author: JAN TV Editorial Team
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