दरअसल नवाज का बीच-बीच में सेना को चुनौती देने का अंदाज सेना को रास नहीं आ रहा था। जब-जब सेना और नवाज शरीफ के बीच टकराव की खबरें आईं इमरान खान पाकिस्तान की सड़क पर बड़े आंदोलन की अगुवाई करते नजर आए। सुलह की कई कोशिशें भी हुईं। नवाज भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते पाकिस्तान की जनता की सहानुभूति खो रहे थे। इसके चलते सेना को नवाज के खिलाफ पीटीआई को आगे बढ़ाने का मौका मिला।
पूर्व विदेश सचिव शशांक के मुताबिक पाकिस्तान में सेना या तो स्वंय मुख्य भूमिका में रहती है या फिर उनका कोई मोहरा सत्ता में होता है। अगर दोनों स्थिति नहीं है तो पाकिस्तान में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। इस बार उन्होंने इमरान को मोहरा बनाया। उनकी सकारात्मक छवि लोगों के सामने पेश करने में सेना की बड़ी भूमिका रही। इमरान आधुनिक कट्टरपंथी चेहरा के तौर पर सेना की पसंद बने थे।
Author: JAN TV Editorial Team
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