मैं गांधी पार्क हूं, मैंने इतिहास बदलते देखा...
(Saharanpur, Saharanpur) मैं गांधी मैदान हूं आजादी से लेकर अब तक मैं कई ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी रहा हूं। आजादी से पहले इस मैदान में आजादी के मतवालों के बड़े-बड़े जलसे होते थे। तो आजादी के बाद चुनावी जनसभाओं से नए-नए इतिहास लिखे गए। पंडित जवाहर लाल नेहरू हो या फिर मोरारजी देसाई या फिर अटल बिहारी वाजपेयी ने यहां पर जनता जनार्दन को संबोधित किया है। कई ऐसी रैलियां रही हैं जो इतिहास बदल गई।

गांधी मैदान सहारनपुर के मध्य स्थित है। 100 साल से भी अधिक का इतिहास समेटे यह मैदान कई मायनों में अहम रहा है। इस बार भले ही चुनावी समर में मैदान की खामोशी नहीं टूट रही हो। लेकिन, पहले ऐसा नहीं था। आजादी से पहले जब देश में नमक आंदोलन हुआ था तो गांधी पार्क में भी एक जलसा हुआ था। जिसके बाद आंदोलनकारियों ने नमक बनाकर कानून को तोड़ा था। आजादी के बाद वर्ष 1952 में पहली बार प्रदेश में विधानसभा के चुनाव हुए। उस समय तत्कालीन पीएम पं जवाहरलाल नेहरू ने गांधी पार्क में जनसभा की थी। उस समय सहारनपुर की यह पहली बड़ी चुनावी जनसभा थी। इसके बाद समय के साथ साथ नेताओं का गांधी पार्क से नाता रहा है।

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