नवरात्र का पर्व शुरू हो चुका है और इन नौ दिनों में देवी पूजा का विशेष महत्व है... धर्म की नगरी काशी में भी नवरात्रि के नौ दिनों में देवी के अलग अलग रूपों की पूजा विधिवत की जाती है.जिसमें पहले दिन माता शैल पुत्री के दर्शन का विधान है. मां का मंदिर काशी के अलई पूरा स्थित है... गौरी रूप में माता मुखनिर्मालिका गौरी के दर्शन का शास्त्रों में वर्णन है.हिमालय के यहां जन्म लेने से भगवती को शैलपुत्री कहा गया. भगवती का वाहन वृषभ है, उनके दाहिने हाथ में त्रिशूल और बायें हाथ में कमल का पुष्प है.इन्हें पार्वती स्वरुप माना जाता है ऐसी मान्यता है की देवी के इस रूप ने ही शिव की कठोर तपस्या की थी.... मान्यता है की इनके दर्शन मात्र से सभी वैवाहिक कष्ट मिट जाते हैं .... वाराणसी में मां का अति प्राचीन मंदिर है... जहा नवरात्र के पहले दिन हजारों श्रधालुयों की भारी भीड़ उमड़ती है
Author: JAN TV Editorial Team
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