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रमज़ान के दौरान दिल्ली की जामा मस्जिद में हमेशा एक विशेष माहौल देखने को मिलता है। इफ़्तार के समय, यहाँ सैकड़ों लोग एक साथ इफ़्तार करते हैं, यह दृश्य बहुत ही आकर्षक और भावुक होता है। लोग एक दूसरे के साथ बैठकर रोज़ा खोलते हैं, यह एकता और भाईचारे का प्रतीक बनता है। जामा मस्जिद, जो कि दिल्ली की सबसे बड़ी और ऐतिहासिक मस्जिद है, रमज़ान के महीने में खासतौर पर उमड़ी हुई भीड़ को देखती है। इफ़्तार के लिए सैकड़ों लोग मस्जिद के आसपास जमा होते हैं, जिसमें मुसलमान और नॉन-मुसलमान दोनों ही शामिल होते हैं। यहाँ पर इफ़्तार के समय विभिन्न प्रकार के खाने-पीने की चीजें, जैसे खजूर, फल, पानी, और पकवान परोसे जाते हैं। जामा मस्जिद का यह दृश्य न सिर्फ धार्मिक एकता को दर्शाता है, बल्कि सामाजिक सद्भाव और समुदाय के बीच प्रेम और सहयोग का भी प्रतीक है। रमज़ान के दौरान रोजा रखने वाले लोग इसके प्रति पूरी शिद्दत और निष्ठा से ध्यान रखते हैं। रोजा केवल भूख और प्यास को सहने का नाम नहीं है, बल्कि यह आत्म-संयम, संयम, और इबादत का भी एक गहरा तरीका है। रोज़ा रखने वाले लोग अपने आहार, व्यवहार और विचारों में शुद्धता लाने की कोशिश करते हैं।
Author: JAN TV Editorial Team
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