धर्म की रक्षा के लिए उठाया शस्त्र
परशुराम को क्षत्रियों के शत्रु के रूप में देखा जाता है, परन्तु उन्होंने केवल उन क्षत्रिय राजाओं के विरुद्ध युद्ध किया जो अन्याय और अहंकार में डूबे हुए थे। अपने पिता जमदग्नि की हत्या से व्यथित होकर उन्होंने अत्याचार के विरुद्ध शस्त्र उठाया। उनका उद्देश्य समाज में धर्म की स्थापना और न्याय की पुनः स्थापना करना था।
भृगु वंश की गौरवगाथा
भगवान परशुराम भृगु वंश से थे। इस वंश में अग्नि के आविष्कारक भृगु ऋषि, शुक्राचार्य, जमदग्नि, च्यवन और महर्षि मार्कण्डेय जैसे महान ऋषि हुए। इसी वंश में लक्ष्मी माता का जन्म भी हुआ माना जाता है। परशुराम ने इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया और ब्राह्मणों में भी न्यायप्रियता और संस्कारों के आधार पर योग्यता की कसौटी रखी।
भगवान परशुराम को चिरंजीवी माना गया है। ऐसा कहा जाता है कि वे महेंद्रगिरि पर्वत पर तपस्या में लीन हैं और कलियुग के अंत में पुनः प्रकट होकर धर्म की स्थापना करेंगे। श्रीराम के काल में उन्होंने राम को परशु-ज्ञान दिया और श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र भी प्रदान किया।
Author: JAN TV Editorial Team
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