इस दिन व्रती सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लेते हैं। फिर शिवलिंग का जल, दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से अभिषेक करते हैं। बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल, फल, चंदन और धूप-दीप अर्पित किए जाते हैं। ‘ॐ नमः शिवाय’ या महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जाता है। रातभर जागरण कर चार प्रहरों में अलग-अलग विधि से शिव पूजन होता है, जिसमें निशीथ काल (मध्यरात्रि) का विशेष महत्व होता है।
मान्यता है कि सावन शिवरात्रि का व्रत करने से सौभाग्य, दीर्घायु, कष्टों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
Author: JAN TV Editorial Team
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