धार्मिक मान्यता है कि इस दिन नाग देवताओं की पूजा करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और सुख-समृद्धि मिलती है। भक्त इस दिन व्रत रखते हैं और व्रत कथा का पाठ करते हैं। पुराणों के अनुसार, जो व्यक्ति नागों को दूध से स्नान कराता है, उसे काल सर्प दोष से मुक्ति मिलती है और उसका कुल नाग भय से मुक्त रहता है। यह दिन नागलोक में भी उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
महाभारत में वर्णित एक कथा के अनुसार, राजा जन्मेजय ने सर्पों के नाश के लिए यज्ञ कराया था, जिसे आस्तिक मुनि ने रोका और नागों की रक्षा की। यह घटना भी श्रावण शुक्ल पंचमी के दिन घटी थी। इस दिन पूजा करने के लिए नाग देवता की मिट्टी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें और उन्हें दूध, रोली, हल्दी, पुष्प व मीठा अर्पित करें। अंत में व्रत कथा पढ़ें और आरती करें।
Author: JAN TV Editorial Team
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