(BIHAR, India)
पीतल के बर्तन की चमक देख कोई भी लालायित हो जाता है ,धनतेरस आने वाला है और हर कोई पीतल का कोई न कोई बर्तन जरुर खरीदता है ,क्योंकि सदियों से ये धारना है पीतल के बर्तन शुद्ध होते हैं तभी तो इस बर्तन को लोग पूजा पाठ में इस्तेमाल करते हैं /इस बर्तन को बनाने वाले कारीगर किस हाल में आज अपनी जीविका चला रहे हैं ये सोचना भी मुश्किल है। हम आपको दिखाते हैं इन कारीगरों की स्थिति जिन चमकदार पीतल बर्तन को बनाने के लिए इसके कारीगर दिन रात मेहनत करते हैं उन कारीगरों का जीवन चमकदार न होकर काला हो चुका है,आज इनलोगों के सामने भूखमरी की स्थिति आ गई है/आरा से 25 किलोमीटर दूर कोइलवर सोन नदी के तट पर बसा परेव गाँव जो पीतल बर्तन के कारखाने के रूप में पुरे देश में प्रचलित है ,यहाँ के बने बर्तन देश विदेश में भेजे जाते हैं ,मगर आज इन बर्तनों को बनाने वाले कारीगर खुद बेहाल और परेशान हैं ।कम मजदूरी और काम ज्यादा ,दिन भर काम करने पर इन्हें कुछ रूपये दिए जाते हैं /कितने बर्तन उद्योग तो बंद हो गए हैं और कितने बंद होने के कागार पर हैं ,सरकार से भी इन्हें कोई सहायता नहीं दि जा रही है / बहार हाल अब देखना ये अहम होगा की क्या इन मजदूरों के पलायन से पीतल का अस्तित्व मिट जायेगा या इनके पुनर्वास के लिए सरकार की नींद खुलेगी।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।