(CHHATTISGARH, India)
इस बीच 32 महिलाओं की हालत गंभीर बनी हुई है। मृतक परिवारों को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया है। इस घटना के बाद सभी नसबंदी कैंप को बंद कर दिया है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दोनों महिलाओं ने शनिवार को बिलासपुर के करीब सकरी गांव में एक निजी अस्पताल में लगे शासकीय स्वास्थ्य शिविर में ऑपरेशन कराया था। इस शिविर में तखतपुर ब्लॉक व आसपास के गावों की 83 महिलाओं ने नसबंदी कराई थी। शवों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण हाइपोवॉलूमिक शॉक या सेप्टिक बताया जा रहा है। जिला प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि सिर्फ छह घंटे में 86 ऑपरेशन कैसे किए गए। जिला अस्पताल के सिविल सर्जन बी. आर. नंदा ने बताया कि बिलासपुर से लगे सकरी गांव में नेमीचंद जैन कैंसर रिसर्च सेंटर में शनिवार को स्वास्थ्य विभाग ने नसबंदी शिविर का आयोजन किया था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी आर के भांगे, डाक्टर प्रमोद तिवारी तथा वरिष्ठ सर्जन डाक्टर आर के गुप्ता सहित अनेक चिकित्सकों और स्वास्थ्य कर्मियों की वहां ड्यूटी लगाई गई थी। आयोग ने पाया कि ऑपरेशन के बाद 46 रोगी बैक्टीरिया से संक्रमित हो गए जो स्पष्ट रूप से संबद्ध चिकित्सकों और कर्मचारियों की ओर से बरती गई लापरवाही को जाहिर करता है।
Author: JAN TV Editorial Team
DISCLAIMER: इस वेबसाइट पर दी गई जानकारी केवल सामान्य एवं शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए है। हमने जानकारी को सटीक रखने का प्रयास किया है, लेकिन इसकी पूर्णता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जाती। तृतीय-पक्ष वेबसाइटों या स्रोतों की सामग्री पर हमारा नियंत्रण नहीं है। इस जानकारी के आधार पर लिया गया कोई भी निर्णय आपके अपने विवेक और जोखिम पर होगा।