फॉक्सवैगन एजी बड़े संकट में फंस गई है। दुनिया की सबसे ज्यादा कार बेचने वाली कार कंपनी ने माना कि दुनियाभर में 1.10 करोड़ डीजल कारों की इमिशन टेस्टिंग में गड़बड़ी कराई थी। कार में ऐसा सॉफ्टवेयर डाला गया, जिसके जरिए इमिशन टेस्ट के सही नतीजे सामने ही नहीं आते थे। कंपनी ने जारी बयान में कहा कि वह इस समस्या वाली कारों की सर्विस के लिए 7.3 अरब डॉलर (करीब 6.5 अरब यूरो) की रकम का इंतजाम अलग से किया है। इस घटना से फॉक्सवैगन की प्राथमिकता और कंपनी के सीईओ मार्टिन विंटरकॉर्न के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए हैं। इतना ही नहीं, इससे कंपनी के शेयर में भारी गिरावट आई है। इसे देखते हुए भारत के रेग्युलेटर्स को भी अब कंपनियों के स्टैंडर्ड को चेक करना होगा। साथ ही यह देखते की जरूरत है कि कंपनियां प्रोडक्शन नियमों का उल्लंघन तो नहीं कर रहीं। कंपनी की ओर से जारी बयान के बाद फॉक्सवैगन के शेयर 18.7 फीसदी गिरकर 108.75 यूरो पर पहुंच गया है। यह कीमत चार साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। गौरतलब है कि एक दिन पहले भी कंपनी के शेयर्स में 17 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। ऐसे में दोनों की भारी गिरावट से फॉक्सवैगन को 25 अरब यूरो की चपत लगी है।
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