मूल रूप से उदुपी के आदमपुर गांव के रहने वाले यूआर राव का जन्म कनार्टकके अडामारू में 10 मार्च 1932 को एक साधारण परिवार में हुआ था। यूआर राव लगातार भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रमों में जुड़े रहे और उन्होंने एमजेके मेनन, सतीश धवन और विक्रम साराभाई जैसे महान वैज्ञानिकों के साथ काम किया था। राव फिलहाल फिजिकल रिसर्च लेर्बोट्री की गवर्निंग काउंसिल के चेयरमेन के पद पर तैनात थे। इसके साथ ही वह थिरुवंतपुरम में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस और टेक्नोलॉजी के चांसलर भी थे। यूआर राव को 10 अंतराष्ट्रीय अवॉर्ड और कई राष्ट्रीय सम्मानों से नवाजा गया था। इस साल उन्हें वर्ष पद्म विभूषण प्रदान किया गया था। सतीश धवन के बाद, यूआर राव ने सबसे लंबे वक्त करीब 10 साल 1984-1994 के बीच इसरो के अध्यक्ष के तौर पर काम किया था।
राव ने बीएचयू से एमएससी की पढ़ाई के बाद महान वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के निदेर्शों में गुजरात विश्वविद्यालय से पीएचडी की थी। उनके काम से प्रभावित होकर सरकार ने अंतरिक्ष विज्ञान में अहम योगदान के लिए उन्हें पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। राव ने 1960 में अपने करियर की शुरुआत से ही भारत में अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी के विकास में और संचार के क्षेत्र में एवं प्राकतिक संसाधनों का दूर से पता लगाने में इस तकनीक के अनुप्रयोगों में अहम योगदान दिया है। वर्षं 1984 में राव अंतरिक्ष विभाग के सचिव और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष बनने के बाद उन्होंने रॉकेट प्रौद्योगिकी के विकास में तेजी लाई, जिसके चलते एएसएलवी रॉकेट का सफल प्रक्षेपण हुआ और साथ ही दो टन तक के उपग्रहों को धुव्रीय कक्षा में स्थापित कर सकने वाले पीएसएलवी का भी सफल प्रक्षेपण संभव हो सका। यूआर राव ने वर्ष 1991 में क्रायोजेनिक तकनीक और भूस्थैतिक उपग्रह प्रक्षेपण यान (जीएसएलवी) के विकास की पहल भी की।
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