(NewDelhi, NewDelhi)
चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस हेमा कोहली की अध्यक्षता में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बैंको द्वारा उधारकर्ताओं को फ्रॉड घोषित करने को लेकर कहा की नेचुरल जस्टिस के प्रिंसिपल को फॉलो करते हुए उधारकर्ताओं को अपनी बात रखने का मौका दिया जाए | बैंक बिना उनकी बात सुने उनके फ्रॉड होने की घोषणा ना करे | अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि फ्रॉड के रूप में अकाउंट्स का क्लासिफिकेशन करने से बोरोअर्स की लाइफ पर इसका बुरा असर पड़ता है, जिससे मानसिक तनाव की स्थिति पैदा होती है | ऐसे में बैंक व्यक्तियों को सुनवाई का मौका दे | बैंको द्वारा ऐसा ना करने पर एक तरह से लोन लेने वालों को 'ब्लैक लिस्ट' में डालने के समान मन जायेगा जिससे आर्थिक रूप से देश की अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा |
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