रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की 49वीं वार्षिक आम बैठक (AGM) को संबोधित करते हुए चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा कि यह आईपीओ कंपनी के लिए इस वर्ष का सबसे महत्वपूर्ण वैल्यू क्रिएशन इवेंट होगा। उन्होंने कहा कि इससे रिलायंस के मौजूदा शेयरधारकों के लिए बड़ी वैल्यू अनलॉक होगी और नए निवेशकों को भी जियो की विकास यात्रा में शामिल होने का अवसर मिलेगा।
प्रस्तावित आईपीओ के तहत 10 रुपये फेस वैल्यू वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इश्यू का अंतिम मूल्य बुक बिल्डिंग प्रक्रिया के जरिए तय होगा। हालांकि कंपनी ने अभी तक प्राइस बैंड या इश्यू के कुल आकार की घोषणा नहीं की है, क्योंकि यह नियामकीय मंजूरियों और अंतिम मूल्य निर्धारण पर निर्भर करेगा।
मुकेश अंबानी ने बताया कि जियो के अगले विकास चरण का नेतृत्व उनके तीनों बच्चे आकाश अंबानी, ईशा अंबानी और अनंत अंबानी करेंगे। उन्होंने कहा कि जियो की लिस्टिंग यह साबित करेगी कि भारत वैश्विक स्तर की तकनीकी कंपनियां बनाने और उनका नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।
जियो के अगले चरण की 5 बड़ी रणनीतियां
कंपनी ने आईपीओ के साथ अपने भविष्य के विस्तार की पांच प्रमुख प्राथमिकताओं का भी ऐलान किया है।
2030 तक सभी ग्राहकों को JioTrue5G नेटवर्क पर लाने का लक्ष्य।
भारत को 6G तकनीक के विकास में वैश्विक नेतृत्व दिलाने की तैयारी।
JioAirFiber के जरिए हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड का तेजी से विस्तार। वर्तमान में प्रतिदिन 60 हजार तक नए कनेक्शन जोड़े जा रहे हैं और 90% इंस्टॉलेशन 24 घंटे के भीतर पूरे किए जा रहे हैं।
JioPC और अन्य क्लाउड सेवाओं के जरिए छोटे एवं मध्यम कारोबारों का डिजिटलीकरण।
उपभोक्ता सेवाओं, नेटवर्क संचालन और कस्टमर सपोर्ट में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का व्यापक इस्तेमाल।
AI और वैश्विक विस्तार पर बड़ा दांव
जियो अपनी स्वदेशी तकनीक, 5G इंफ्रास्ट्रक्चर और AI प्लेटफॉर्म को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी व्यावसायिक रूप से उतारने की तैयारी कर रही है। कंपनी का मानना है कि प्रीमियम 5G सेवाओं, AI आधारित उत्पादों और एंटरप्राइज सॉल्यूशंस से प्रति ग्राहक औसत राजस्व (ARPU) में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
रिलायंस ने AI क्षेत्र में भी बड़ा निवेश किया है। वर्ष 2023 में कंपनी ने एनवीडिया (NVIDIA) के साथ साझेदारी कर भारत के लिए AI इंफ्रास्ट्रक्चर और बड़े भाषा मॉडल (LLMs) विकसित करने की शुरुआत की थी। इस वर्ष कंपनी ने अगले 7 वर्षों में AI क्षेत्र में 10 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की योजना का भी ऐलान किया है। इसके अलावा Jio Intelligence नामक नई सहायक कंपनी डेटा सेंटर और एज कंप्यूटिंग के जरिए AI सेवाओं का विस्तार करेगी।
दुनिया के दिग्गज निवेशकों का भरोसा
वर्ष 2020 में जियो प्लेटफॉर्म्स ने 20 अरब डॉलर से अधिक की फंडिंग जुटाई थी। उस दौर में Meta, Google, KKR, Silver Lake और General Atlantic जैसे वैश्विक निवेशकों ने कंपनी में निवेश किया था। फिलहाल रिलायंस इंडस्ट्रीज़ की जियो प्लेटफॉर्म्स में 66.43% हिस्सेदारी है, जबकि Meta के पास 9.99% हिस्सेदारी मौजूद है।
हालांकि जियो का आईपीओ ऐसे समय आ रहा है जब वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा बाजार में अस्थिरता के चलते भारत के प्राथमिक शेयर बाजार में निवेशकों का उत्साह कुछ कमजोर पड़ा है। इसी वजह से PhonePe, Curefoods और Sify Infinit Space जैसी कई कंपनियों ने भी अपने आईपीओ की योजनाओं पर पुनर्विचार किया है।
Author: JAN TV Editorial Team
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